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भारतमाला मुआवजा घोटाले में ED का बड़ा खुलासा; एक ही परिवार को मिले ₹10 करोड़ से अधिक, 10 गांव जांच के दायरे में

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Scam News: छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना के अंतर्गत हुए जमीन अधिग्रहण और मुआवजा वितरण में एक बहुत बड़े वित्तीय घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) की तफ्तीश में लगातार कई चौंकाने वाले और नए तथ्य सामने आ रहे हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने रायपुर जिले के अभनपुर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नायकबांधा गांव में हुए भू-अर्जन (Land Acquisition) और भारी-भरकम मुआवजा वितरण से जुड़े सरकारी दस्तावेजों की बारीकी से स्क्रूटनी और गहन पड़ताल शुरू कर दी है। जांच में सामने आया है कि नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।

​महज 48 डिसमिल जमीन पर बांट दिए ₹11.62 करोड़

​ईडी की प्रारंभिक जांच और सरकारी दस्तावेजों के विश्लेषण से जो हैरान करने वाली कड़ियां जुड़ी हैं, उनके मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

​एक ही परिवार को छप्परफाड़ फायदा: नायकबांधा गांव में सक्रिय एक ही रसूखदार परिवार के विभिन्न महिला और पुरुष सदस्यों के नाम पर अलग-अलग फाइलें तैयार कर कुल 10 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मुआवजे के रूप में बांट दी गई।

​अजीबो-गरीब मूल्यांकन: रिकॉर्ड के मुताबिक, कुल 14 अलग-अलग प्रकरणों में मात्र 0.4800 हेक्टेयर (यानी करीब 48 डिसमिल) जैसी बेहद कम भूमि के एवज में कुल 11 करोड़ 62 लाख रुपये से अधिक का मुआवजा स्वीकृत किया गया। अधिकांश आदेश अप्रैल 2020 के दौरान जारी हुए थे।

​छोटी जमीनों पर बड़ा खेल: कई मामलों में महज 0.03 से 0.05 हेक्टेयर जैसी छोटी जमीनों के टुकड़ों पर 70 लाख रुपये से लेकर 1.19 करोड़ रुपये तक का भुगतान किया गया, जिसने मुआवजा निर्धारण की प्रक्रिया और भूमि के वर्गीकरण (स्वरूप) पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

​10 से अधिक गांव और तत्कालीन राजस्व अधिकारी रडार पर

​जांच एजेंसियों को इस बात के भी पुख्ता इनपुट्स मिले हैं कि कुछ चुनिंदा प्रभावशाली व्यक्तियों के नाम दूसरे चरण के भू-अर्जन रिकॉर्ड में भी चालाकी से दर्ज किए गए हैं। अधिकारी अब इस बात का सत्यापन (वेरिफिकेशन) कर रहे हैं कि कहीं एक ही खसरा नंबर या एक ही भूमि पर दो बार मुआवजा तो नहीं उठा लिया गया।

​जांच के घेरे में आए प्रमुख गांव: सूत्रों के अनुसार, अभनपुर अनुविभाग के अंतर्गत आने वाले नायकबांधा, झांकी, उरला, मुड़पार, सातपारा, कोलर, टोकरो, बिरोदा, नवागांव और डोमा सहित कुल 10 गांवों के भू-अर्जन प्रकरण अब पूरी तरह से ईडी और अन्य जांच एजेंसियों के रडार पर हैं।

​ईडी अब इस बात की भी मनी ट्रेल (Money Trail) खंगाल रही है कि मुआवजे के रूप में प्राप्त इस अकूत धनराशि को कहां-कहां और किन संपत्तियों में निवेश (Invest) किया गया है। साथ ही, उस समय पदस्थ रहे संबंधित राजस्व अधिकारियों और भूमि अधिग्रहण अधिकारियों (LAO) की भूमिका की भी कड़ाई से जांच की जा रही है कि उन्होंने किस आधार पर इतनी मोटी रकम को मंजूरी दी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अब सरकारी खजाने को चूना लगाने वाले दोषियों की जवाबदेही तय करने की मांग तेज हो गई है।

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