बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में विकास के बड़े-बड़े और ऊंचे दावे करने वाले नगर निगम प्रशासन की एक बेहद गंभीर और स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाली लापरवाही सामने आई है। शहर का जिम्मेदार नगर निगम स्थानीय नागरिकों को बुनियादी और स्वच्छ पेयजल तक उपलब्ध कराने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है। यह गंभीर आरोप बिलासपुर के सरकंडा क्षेत्र के वार्डवासी लगा रहे हैं। सोशल मीडिया और मीडिया के सामने कांच व प्लास्टिक की बोतलों में बदबूदार, पीला और गंदा पानी भरकर वार्ड क्रमांक 63 और 64 के रहवासी नगर निगम के खोखले दावों की सरेआम पोल खोल रहे हैं।
स्थानीय रहवासियों का कहना है कि वे पिछले एक महीने से नलों के जरिए अपने घरों में पहुंच रहे अत्यधिक दूषित, गंदे और बदबूदार पेयजल की समस्या से लगातार जूझ रहे हैं। यह पानी इतना गंदा है कि इसे कपड़े धोने या नहाने के उपयोग में भी नहीं लाया जा सकता, पीना तो दूर की बात है। सरकंडा अंचल के इन दो प्रमुख वार्डों के लोग हर दिन सुबह-शाम नलों से आने वाले इस गंदे पानी को देखकर डरे हुए हैं। भीषण गर्मी और उमस के इस मौसम में दूषित पानी के सेवन से इलाके में डायरिया, पीलिया, फूड पॉइजनिंग और पेट से जुड़ी गंभीर बीमारियों के फैलने का खतरा तेजी से बढ़ गया है। इसके बावजूद नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी और स्वास्थ्य अमला कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है और जनता की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
वार्डवासियों ने रोष व्यक्त करते हुए बताया कि मुख्य सड़क और अंदरूनी गलियों के निर्माण के दौरान जल प्रदाय करने वाली मुख्य पाइपलाइन कई जगहों पर क्षतिग्रस्त (लीकेज) हो गई है। इसी लीकेज की वजह से नालियों का गंदा और दूषित पानी पीने वाले पानी की सप्लाई लाइन में मिल रहा है और नलों के माध्यम से सीधे लोगों के किचन तक पहुंच रहा है। रहवासियों ने इस संबंध में कई बार स्थानीय पार्षदों, जोन कमिश्नर और बिलासपुर महापौर से लिखित व मौखिक शिकायतें की हैं, लेकिन हर बार उन्हें केवल कोरा आश्वासन ही मिला है, जमीनी स्तर पर सुधार का कोई कार्य शुरू नहीं हुआ। क्षेत्र की महिलाओं और बुजुर्गों ने चेतावनी दी है कि यदि अगले दो दिनों के भीतर पाइपलाइन के लीकेज को ठीक कर स्वच्छ पानी की आपूर्ति बहाल नहीं की गई, तो वे बिलासपुर नगर निगम मुख्यालय का घेराव करेंगे और उग्र मटका फोड़ प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे।