छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य महकमे और दवा खरीदी की व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करने वाला गंभीर मामला सामने आया है। पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में अमानक और घटिया दवाइयों की सप्लाई करने के कारण जिस दवा निर्माता कंपनी को तीन साल के लिए पूरी तरह प्रतिबंधित (Blacklisted) कर दिया गया है, उसी कंपनी से छत्तीसगढ़ में हर महीने लगभग छह करोड़ रुपये की दवाइयों की भारी-भरकम खरीदी धड़ल्ले से जारी है। इस खुलासे के बाद प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में बांटी जा रही दवाइयों की गुणवत्ता को लेकर हड़कंप मच गया है।
एमपी ने 8 मई 2026 को जारी किया था प्रतिबंध का कड़ा आदेश
दवा निर्माता कंपनी यूनिकेयर इंडिया लिमिटेड (Unicare India Limited) के खिलाफ मध्यप्रदेश सरकार ने सख्त प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की थी, जिसकी टाइमलाइन और कारण इस प्रकार हैं:
गुणवत्ता परीक्षण में फेल: मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेस कार्पोरेशन लिमिटेड द्वारा कराए गए सरकारी लैब टेस्ट में इस कंपनी द्वारा सप्लाई की जा रही दवाइयों के लगातार तीन अलग-अलग बैच फेल (Unstandardized) पाए गए।
लैक्टुलोज दवा थी अमानक: कंपनी पर अस्पतालों में मरीजों को दी जाने वाली महत्वपूर्ण 'लैक्टुलोज' (Lactulose) सिरप/दवा के अमानक और सब-स्टैंडर्ड बैच खपाने का गंभीर आरोप सिद्ध हुआ था।
3 साल का बैन: मरीजों की सेहत से खिलवाड़ पाए जाने पर एमपी सरकार ने पिछले ही महीने 8 मई 2026 को कड़ा आदेश जारी कर कंपनी को तीन वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया था।
छत्तीसगढ़ में नियमों को ताक पर रख जारी है अनुबंध
नियमों के मुताबिक, यदि कोई कंपनी किसी पड़ोसी या अन्य राज्य में अमानक दवाओं के कारण प्रतिबंधित की जाती है, तो देश के अन्य राज्यों के स्वास्थ्य विभागों को भी इसकी समीक्षा कर अनुबंध निरस्त करना होता है। लेकिन छत्तीसगढ़ में तस्वीर इसके बिल्कुल उलट है:
करोड़ों का टर्नओवर: ब्लैकलिस्ट होने के बावजूद छत्तीसगढ़ में इस कंपनी का अनुबंध (Contract) न सिर्फ बरकरार है, बल्कि सीजीएमएससी (CGMSC) और स्वास्थ्य विभाग द्वारा हर महीने करीब 6 करोड़ रुपये की दवाओं का ऑर्डर इस कंपनी को दिया जा रहा है।
मरीजों की जान को खतरा: अमानक दवा निर्माता कंपनी से सप्लाई जारी रहने के कारण छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों में आने वाले गरीब मरीजों की सेहत और जान को सीधा खतरा पैदा हो गया है।
जांच की उठ रही मांग: इस मामले के उजागर होने के बाद अब छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों और जिम्मेदार अफसरों की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठने लगी हैं। सामाजिक संगठनों और विपक्ष द्वारा इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और छत्तीसगढ़ में भी कंपनी का टेंडर तत्काल निरस्त कर राजसात करने की मांग तेज हो गई है।