CG News- छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले के लोरमी क्षेत्र से सुशासन और पर्यावरण संरक्षण की एक बेहद अनोखी और दिल को छू लेने वाली खबर सामने आई है। लोरमी में सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और समस्याओं के निवारण के लिए 'सुशासन तिहार' के तहत एक विशेष शिविर का आयोजन किया गया था। इस शिविर में जहां लोग राशन, पानी, बिजली और अपनी व्यक्तिगत समस्याओं के आवेदन लेकर पहुंच रहे थे, वहीं इलाके के एक सच्चे पर्यावरण प्रेमी मनमोहन दास एक ऐसा अनोखा आवेदन लेकर पहुंचे, जिसे देखकर वहां मौजूद प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी भी हैरान रह गए। मनमोहन दास ने अधिकारियों के सामने हाथ जोड़कर भावुक अपील की है कि विकास के नाम पर एक ऐतिहासिक और विशालकाय बरगद के पेड़ की बलि न चढ़ाई जाए, बल्कि उसे आधुनिक तकनीक से दूसरी जगह शिफ्ट (ट्रांसप्लांट) कर दिया जाए।
आवेदन सौंपते हुए पर्यावरण प्रेमी मनमोहन दास ने बताया कि लोरमी क्षेत्र में इन दिनों सड़क चौड़ीकरण (Road Widening) का काम बड़े पैमाने पर चल रहा है। विकास की इस अंधी दौड़ और सड़कों को चौड़ा करने के नाम पर क्षेत्र में पहले ही बड़ी संख्या में हरे-भरे पेड़ों की बेरहमी से कटाई की जा चुकी है, जिससे स्थानीय पर्यावरण को भारी और अपूरणीय क्षति पहुंच रही है। इसी चौड़ीकरण की जद में अब एक विशेष प्रजाति का बेहद पुराना और विशाल बरगद का पेड़ भी आ गया है। मनमोहन दास का कहना है कि यह बरगद का पेड़ न केवल दशकों पुराना है, बल्कि पर्यावरण के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है, जो अनगिनत पक्षियों और जीवों का आशियाना भी है।
उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से मार्मिक अपील करते हुए कहा कि 'साहब, इस पेड़ को काटो मत, इसे कहीं और शिफ्ट करा दो।' उन्होंने सरकार से मांग की है कि आज के आधुनिक दौर में जब ट्री ट्रांसप्लांटेशन (पेड़ को जड़ समेत निकालकर दूसरी जगह लगाना) जैसी तकनीकें उपलब्ध हैं, तो इस ऐतिहासिक बरगद को बचाने के लिए भी इसी तकनीक का सहारा लिया जाना चाहिए। सुशासन तिहार के शिविर में आए इस अनोखे और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील आवेदन की चर्चा अब पूरे मुंगेली जिले में जोर-शोर से हो रही है। अधिकारियों ने आवेदन को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग और लोक निर्माण विभाग (PWD) के जिम्मेदारों को इस दिशा में सकारात्मक और तकनीकी संभावनाओं की जांच करने के निर्देश दिए हैं।