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Chhattisgarh Politics: मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलों के बीच देर रात तक चली सीएम विष्णुदेव साय की इमरजेंसी मीटिंग, मंत्रियों का टटोला रिपोर्ट कार्ड

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रायपुर: छत्तीसगढ़ की सियासत में इन दिनों भारी हलचल देखी जा रही है। राज्य की भाजपा सरकार के ढाई वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के ऐतिहासिक मोड़ पर अब प्रशासनिक और राजनीतिक कसावट को बेहद तेज कर दिया गया है। इसी कड़ी में राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में गुरुवार की रात करीब नौ बजे अचानक मंत्रियों की एक आपात और विशेष बैठक बुलाई गई, जो देर रात तक लगातार चलती रही। इस औचक और हाई-प्रोफाइल मीटिंग के बाद से ही प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल और कुछ मंत्रियों की छुट्टी होने की अटकलें बेहद तेज हो गई हैं।

​विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई इस इमरजेंसी बैठक का मुख्य एजेंडा सभी मंत्रियों के अब तक के कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड खंगालना था। बैठक में मुख्यमंत्री ने एक-एक कर सभी विभागों के कामकाज, बजटीय घोषणाओं के क्रियान्वयन और जनकल्याणकारी योजनाओं की जमीनी प्रगति की कड़ाई से समीक्षा की। मंत्रियों से उनके विभागों की उपलब्धियों और भविष्य के लक्ष्यों को लेकर सीधे सवाल-जवाब किए गए। बताया जा रहा है कि जिन मंत्रियों का परफॉर्मेंस उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है, उन्हें संगठन और सरकार की ओर से कड़े निर्देश दिए गए हैं।

​राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार के ढाई साल पूरे होने के बाद यह बैठक आगामी रणनीतियों और प्रशासनिक कसावट के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। नए चेहरों को मौका देने और कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभागों में बदलाव करने की सुगबुगाहट पिछले कुछ समय से चल रही थी, जिसे इस देर रात तक चली बैठक ने और अधिक हवा दे दी है। मुख्यमंत्री साय इस बैठक के जरिए यह संदेश देना चाहते हैं कि सरकार की छवि और कामकाज की रफ्तार से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा, और जो परफॉर्म करेगा वही पद पर बना रहेगा।

​घंटों चली इस मैराथन बैठक के खत्म होने के बाद हालांकि किसी भी मंत्री या आधिकारिक सूत्र ने खुलकर कुछ भी कहने से परहेज किया, लेकिन अंदरखाने से छनकर आ रही खबरें बताती हैं कि जल्द ही प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इस बैठक में सरकार के आगामी ढाई साल के कार्यकाल का एक रोडमैप भी तैयार किया गया है, ताकि बस्तर से लेकर सरगुजा तक विकास कार्यों को और अधिक गति दी जा सके। अब देखना होगा कि इस आपात बैठक के बाद साय कैबिनेट का क्या नया स्वरूप सामने आता है।

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