छत्तीसगढ़ में लघु वनोपज आधारित आजीविका को बढ़ावा देने की सरकारी कोशिशें अब धरातल पर रंग लाने लगी हैं। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के नेतृत्व और मार्गदर्शन में जशपुर जिले के वन धन विकास केंद्र (VDVK) पंचक्की ने एक नया इतिहास रच दिया है। यहां के उरांव आदिवासी समुदाय के लोगों ने कभी दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर रहने वाली अपनी जिंदगी को पूरी तरह बदल डाला है। इस केंद्र के माध्यम से ग्रामीणों ने मिलकर ₹1.91 करोड़ का भारी-भरकम और सफल बिजनेस खड़ा कर ग्रामीण उद्यमिता की एक बेमिसाल और प्रेरक कहानी लिखी है।
दरअसल, वन मंत्री केदार कश्यप की यह दूरगामी सोच थी कि जंगलों से मिलने वाले महुआ, इमली और अन्य जड़ी-बूटियां सिर्फ बीनने और बेचने तक सीमित न रहें, बल्कि स्थानीय स्तर पर ही उनका मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) किया जाए। इसी विजन को साकार करने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ और ट्राइफेड के सहयोग से प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन के तहत इस केंद्र को आधुनिक मशीनों और प्रोसेसिंग तकनीकों से लैस किया गया। इसके बाद यहां तैयार होने वाले शुद्ध उत्पादों को ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ ब्रांड के तहत बाजार में उतारा गया, जिसे ग्राहकों ने हाथों-हाथ लिया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में चल रही इस योजना का असर यह हुआ कि जो आदिवासी परिवार कभी दो वक्त की रोटी और रोजगार की तलाश में बड़े शहरों की तरफ पलायन करने को मजबूर थे, वे आज अपने ही गांव में सम्मानजनक कमाई कर रहे हैं। वन मंत्री केदार कश्यप ने जशपुर के इस मॉडल को पूरे प्रदेश के लिए एक प्रेरणास्रोत बताया है। उन्होंने कहा कि इस वनाधारित अर्थव्यवस्था से न सिर्फ आदिवासी परिवारों का जीवन स्तर सुधरा है, बल्कि उनके बच्चों को बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं भी मिलने लगी हैं।