Raipur: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आयोजित किया जाने वाला 'सुशासन तिहार' केवल जनसंवाद का मंच नहीं, बल्कि आम जनता की आकांक्षाओं को शीघ्रता से धरातल पर उतारने का एक बेहद प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। आम नागरिकों की समस्याओं और मांगों के त्वरित निराकरण के लिए राज्य शासन एवं जिला प्रशासन द्वारा अभूतपूर्व संवेदनशीलता और तत्परता का प्रदर्शन किया जा रहा है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री द्वारा सरगुजा प्रवास के दौरान सीधे ग्रामीणों के बीच जाकर की गई महत्वपूर्ण घोषणाओं को रिकॉर्ड समय के भीतर आधिकारिक प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।
उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सुशासन तिहार के अंतर्गत सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड में स्थित ग्राम पंचायत सिलमा के शांतिपारा पहुंचे थे। इस जन चौपाल में उन्होंने चौपाल लगाकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया था और क्षेत्र के विकास की आवश्यकताओं तथा विभिन्न बुनियादी समस्याओं की जानकारी लेते हुए तत्काल कई विकास कार्यों की घोषणाएं की थीं। मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप जिला प्रशासन ने फाइलों को अटकाने के बजाय त्वरित कार्रवाई करते हुए इन सभी निर्माण कार्यों के लिए वित्तीय और प्रशासनिक मंजूरी दे दी है।
प्रशासनिक स्वीकृति के तहत ग्राम सिलमा में जिला खनिज न्यास मद (DMF) एवं मनरेगा (MGNREGA) के अभिसरण (कन्वर्जेंस) से ₹18.30 लाख की लागत से अत्याधुनिक नवीन पंचायत भवन का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही, ग्रामीणों की सुविधा के लिए डीएमएफ मद से ₹2.50 लाख की लागत से सर्वसुविधायुक्त मुक्तिधाम तथा मनरेगा मद से ₹11.63 लाख की लागत से नए सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) राशन दुकान भवन के निर्माण को भी मंजूरी दे दी गई है। इसी तरह, ग्राम कुनकुरीकला में भी डीएमएफ और मनरेगा के तालमेल से ₹18.30 लाख की लागत से एक नया पंचायत भवन बनेगा।
मुख्यमंत्री की इन लोक-कल्याणकारी घोषणाओं पर इतनी तेजी से अमल होने पर सरगुजा अंचल के ग्रामीणों ने अत्यधिक प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति अपना गहरा आभार व्यक्त किया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सुशासन तिहार के माध्यम से आज शासन और प्रशासन सीधे जनता के द्वार तक स्वयं पहुंच रहा है, जिससे न केवल उनकी समस्याएं सुनी जा रही हैं बल्कि उनके समयबद्ध और स्थायी समाधान के लिए कड़े कदम भी उठाए जा रहे हैं। इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में अधोसंरचना मजबूत हो रही है और जमीनी स्तर पर वास्तविक सुशासन की अवधारणा साकार हो रही है।