BREAKING

वैश्विक पाबंदियों के बीच भारत की बड़ी छलांग: रूस से कच्चे तेल के आयात में 21% का तगड़ा उछाल, बना दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार!

Share:

वैश्विक प्रतिबंधों और कूटनीतिक दबावों के बावजूद भारत और रूस के बीच ऊर्जा व्यापार लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही उथल-पुथल के बीच भारतीय रिफाइनरियों ने रूस से कच्चे तेल (Crude Oil) के आयात में एक बार फिर तगड़ा उछाल दर्ज किया है। 'सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर' (CREA) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत दुनिया में रूसी जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है। इस सूची में पहले स्थान पर चीन का कब्जा है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने रूस से लगभग 5.8 अरब यूरो (करीब 6.7 अरब अमेरिकी डॉलर) मूल्य के हाइड्रोकार्बन का आयात किया है। इस कुल आयात में सबसे बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का है, जो कुल खरीद का लगभग 83 प्रतिशत यानी 4.8 अरब यूरो है। इसके अलावा भारत ने रूस से 550 मिलियन यूरो के तेल उत्पाद और 429 मिलियन यूरो के कोयले का भी आयात किया है।

मासिक आयात में 21% की भारी बढ़ोतरी

आंकड़े बताते हैं कि भारत के कुल कच्चे तेल के आयात में महीने-दर-महीने के आधार पर 8 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, लेकिन रूसी तेल के आयात की रफ्तार इससे दोगुनी से भी अधिक रही। भारत द्वारा खरीदे जाने वाले रूसी तेल की मात्रा में पिछले महीने की तुलना में 21 प्रतिशत का जबरदस्त उछाल आया है। वैश्विक तेल बाजार के कुल निर्यात शेयर की बात करें तो रूस के कुल कच्चे तेल के निर्यात का 50 प्रतिशत हिस्सा अकेले चीन ने खरीदा, जबकि 36 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ भारत दूसरे स्थान पर मजबूती से डटा हुआ है। तुर्की 6 प्रतिशत के साथ तीसरे और यूरोपीय संघ (EU) पाबंदियों के बावजूद 5 प्रतिशत के साथ चौथे नंबर पर है।

इन भारतीय रिफाइनरियों में पहुंचे सबसे ज्यादा जहाज

रूस से आने वाले तेल जहाजों (कारगो) की सबसे ज्यादा अनलोडिंग भारत के प्रमुख रिफाइनिंग हब पर देखी गई। गुजरात के वाडिनार रिफाइनरी में रूसी तेल की आवक में 36 फीसदी और जामनगर रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स में 14 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके अलावा, ओडिशा की पारादीप रिफाइनरी ने पिछले दो वर्षों में रूसी कच्चे तेल की अपनी सबसे बड़ी खेप अनलोड की है। सरकारी क्षेत्र की रिफाइनरियों जैसे मैंगलोर और विशाखापत्तनम (Vizag) में भी रूसी तेल की मांग में क्रमशः 13% और 42% का भारी उछाल आया है। इस रियायती तेल की मदद से भारतीय रिफाइनरियां न केवल अपनी घरेलू मांग को किफायती दरों पर पूरा कर रही हैं, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा को भी सुदृढ़ कर रही हैं।

Share: