रायपुर: छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए राज्य की विष्णु देव साय सरकार ने एक बेहद बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। सरकार ने प्रदेश में फसल विविधीकरण (Crop Diversification) को बढ़ावा देने, भूजल स्तर को सुधारने और किसानों की आय में बढ़ोतरी करने के उद्देश्य से 'कृषक उन्नति योजना' के नए और संशोधित स्वरूप को हरी झंडी दे दी है। इस योजना के तहत, जो किसान पारंपरिक रूप से केवल धान की खेती करते आ रहे हैं, वे यदि अब धान के बदले अन्य वैकल्पिक और नकदी फसलें उगाते हैं, तो उन्हें छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा 15,000 रुपये प्रति एकड़ की बंपर इनपुट (आदान) सहायता राशि सीधे उनके बैंक खातों में प्रदान की जाएगी।
कैबिनेट की बैठक में लिए गए इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य धान पर किसानों की अत्यधिक निर्भरता को कम करना और पानी की ज्यादा खपत वाली फसलों से हटकर पर्यावरण अनुकूल खेती को प्रोत्साहित करना है। सरकार द्वारा दी जाने वाली इस बड़ी आर्थिक मदद से किसान उन्नत बीज, खाद, कीटनाशक और आधुनिक कृषि उपकरणों की व्यवस्था आसानी से कर सकेंगे, जिससे उनकी खेती की लागत कम होगी और मुनाफा दोगुना होगा।
किन फसलों को उगाने पर मिलेगा लाभ?
विष्णु देव साय कैबिनेट के फैसले के अनुसार, खरीफ सीजन से जो किसान धान की फसल छोड़कर या अपने खेतों के कुछ हिस्से में निम्नलिखित फसलों की बुवाई करेंगे, वे इस योजना के पात्र होंगे:
दलहन फसलें: अरहर, मूंग, उड़द, चना आदि।
तिलहन फसलें: सोयाबीन, मूंगफली, सूरजमुखी, तिल आदि।
अन्य फसलें: मक्का (Maize), कपास (Cotton) और मिलेट्स (मोटे अनाज जैसे कोदो, कुटकी, रागी)।
लाभ पाने के लिए किसानों को क्या करना होगा? (पात्रता और प्रक्रिया)
इस बंपर योजना का लाभ उठाने के लिए सरकार ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और डिजिटल बनाया है। किसानों को निम्नलिखित तीन मुख्य चरणों को पूरा करना अनिवार्य होगा:
1. एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीकरण: योजना का लाभ लेने के लिए सभी इच्छुक किसानों को राज्य सरकार के 'एकीकृत किसान पोर्टल' (Integrated Farmer Portal) पर अपनी भूमि और चुनी गई वैकल्पिक फसल की जानकारी के साथ ऑनलाइन पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) कराना होगा।
2. एग्रीस्टैक (AgriStack) नामाकंन: किसानों का एग्रीस्टैक पहचान प्रणाली के तहत डिजिटल नामांकन होना जरूरी है, जिससे किसान की पहचान और भूमि रिकॉर्ड को सीधे जोड़ा जा सके।
3. डिजिटल फसल सर्वेक्षण (Digital Crop Survey): इस योजना का लाभ पारदर्शी तरीके से सीधे बैंक खाते में (DBT के माध्यम से) तब भेजा जाएगा, जब राजस्व और कृषि विभाग की टीम द्वारा 'डिजिटल क्रॉप सर्वे' के माध्यम से खेत में बोई गई गैर-धान फसल का भौतिक और डिजिटल सत्यापन (वेरिफिकेशन) रिकॉर्ड में दर्ज कर लिया जाएगा।
정 सरकार को पूरी उम्मीद है कि इस क्रांतिकारी कदम से छत्तीसगढ़ की कृषि अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा मिलेगी, जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और राज्य के करीब 25 लाख से अधिक किसान आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाएंगे।