Sand Mining Crackdown: छत्तीसगढ़ में अवैध रेत खनन और इसके अवैध भंडारण करने वाले माफियाओं के खिलाफ प्रदेश सरकार ने पूरी तरह से कमर कस ली है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के कड़े निर्देशों के बाद अब खनिज विभाग का मैदानी अमला 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर काम कर रहा है। अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण और इसकी पूरी तरह से रोकथाम के लिए पूरे प्रदेश भर में एक बड़ा विशेष अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत लगातार सख्त और बड़ी दंडात्मक कार्रवाइयां की जा रही हैं।
इसी कड़ी में केंद्रीय खनि उड़नदस्ता की संयुक्त टीम ने प्राप्त शिकायतों पर त्वरित एक्शन लेते हुए 21 जून की रात को संवेदनशील खनन क्षेत्रों का अचानक (रात्रिकालीन औचक) निरीक्षण किया। जिला एम.सी.बी. की केल्हारी तहसील के अंतर्गत दंडाहस्वाही स्थित केवाई नदी, पसौरी, कुटरा और हसदेव नदी क्षेत्रों में की गई इस सघन जांच के दौरान दो स्वीकृत अस्थायी रेत भंडारण स्थलों का बारीकी से परीक्षण किया गया। इस कार्रवाई की सबसे खास बात यह रही कि मौके पर मौजूद रेत की सही मात्रा का सटीक आकलन करने के लिए आधुनिक और हाईटेक ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल किया गया। जांच में भंडारण नियमों और शर्तों का खुला उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित संचालकों को 'कारण बताओ नोटिस' जारी कर तीन दिनों के भीतर जवाब तलब किया गया है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस कार्रवाई के जरिए कड़ा संदेश देते हुए स्पष्ट किया है कि छत्तीसगढ़ में किसी भी तरह की अवैध उत्खनन गतिविधियों के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने अधिकारियों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और खनिज संपदा का नियमानुसार दोहन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। वहीं खनिज सचिव श्री पी. दयानंद ने भी विभागीय अफसरों को राज्य के पहुंच-विहीन और दूरदराज के संवेदनशील इलाकों पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखने को कहा है। अब संदिग्ध और संभावित अवैध रेत खनन वाले क्षेत्रों को चिन्हित कर लगातार हाईटेक ड्रोन सर्वे से निगरानी की जा रही है, ताकि पर्यावरण और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों पर पूरी तरह से नकेल कसी जा सके।