Surajpur Boat Accident (सूरजपुर नाव हादसा): छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग के सूरजपुर जिले से एक बेहद दुखद और रोंगटे खड़े कर देने वाली बड़ी दुर्घटना सामने आई है। जिले के प्रसिद्ध बतरा बांध (Batra Dam) के गहरे पानी में 9 ग्रामीणों से भरी एक देसी नाव (डोंगी) अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई। नाव पलटते ही बांध के शांत पानी में चीख-पुकार मच गई। इस भयानक हादसे में नाव पर सवार 6 ग्रामीणों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए और पानी की लहरों से जूझते हुए तैरकर किसी तरह बांध के किनारे पहुंचकर अपनी जान बचा ली। लेकिन, इस जल त्रासदी में 3 ग्रामीण अभी भी गहरे पानी में लापता बताए जा रहे हैं, जिनका दूर-दूर तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। इस खौफनाक नाव पलटने की घटना की सूचना जैसे ही आसपास के ग्रामीणों को मिली, मौके पर सैकड़ों लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। स्थानीय प्रशासन को तुरंत इसकी सूचना दी गई, जिसके बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन और जिला आपदा प्रतिक्रिया बल (DDRF) की विशेष रेस्क्यू टीम गोताखोरों और लाइफ जैकेट्स के साथ बतरा बांध पहुंच चुकी है। लापता ग्रामीणों को सकुशल बाहर निकालने के लिए पानी में युद्ध स्तर पर एक बड़ा रेस्क्यू और सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है।
सूरजपुर जिले के बतरा अंचल से मिली प्राथमिक और ग्राउंड जीरो की जानकारी के अनुसार, सभी ग्रामीण स्थानीय व आसपास के क्षेत्रों के रहने वाले बताए जा रहे हैं। ये ग्रामीण किसी दैनिक घरेलू काम या बांध पार करने के उद्देश्य से एक छोटी देसी डोंगी नाव पर सवार हुए थे। क्षमता से अधिक वजन या पानी के तेज बहाव और संतुलन बिगड़ने के कारण नाव बीच बांध के गहरे पानी में जाकर अचानक पलट गई। नाव पलटते ही उस पर सवार सभी 9 लोग पानी में डूबने लगे। जो लोग तैरना जानते थे, उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और तैरकर किनारे आ गए। किनारे पहुंचे ग्रामीणों की हालत बेहद डरी और सहमी हुई है। उन्होंने ही गांव वालों को इस बड़े हादसे की जानकारी दी, जिसके बाद बतरा गांव समेत पूरे इलाके में मातम पसर गया है। लापता 3 ग्रामीणों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे बांध के किनारे टकटकी लगाए अपने अपनों के सकुशल लौटने की प्रार्थना कर रहे हैं।
मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए सूरजपुर जिला पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए हैं। जिला आपदा प्रतिक्रिया बल (DDRF) के कुशल गोताखोर मोटर बोट और आधुनिक रेस्क्यू उपकरणों की मदद से बतरा बांध के उस हिस्से में लगातार जाल डाल रहे हैं और गहराई में सर्चिंग कर रहे हैं जहां नाव पलटने की बात कही जा रही है। बांध में पानी का स्तर अधिक होने और नीचे कीचड़ व जलीय वनस्पतियों की मौजूदगी के कारण रेस्क्यू टीम को शुरुआती दौर में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पुलिस प्रशासन ने बांध के चारों ओर सुरक्षा घेरा बना दिया है ताकि भीड़ के कारण बचाव कार्य में कोई व्यवधान उत्पन्न न हो। स्थानीय मछुआरों और ग्रामीणों की भी मदद ली जा रही है जो बांध के चप्पे-चप्पे से वाकिफ हैं।
अहमद, सूरजपुर से मिली ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती अंधेरा होने से पहले तीनों लापता ग्रामीणों को ढूंढ निकालने की है, क्योंकि रात के समय गहरे बांध में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना बेहद जोखिम भरा और मुश्किल हो जाता है। मुख्यमंत्री कार्यालय और राज्य आपदा प्रबंधन विभाग भी इस पूरी घटनाक्रम पर सीधे नजर बनाए हुए है और सूरजपुर जिला प्रशासन को रायपुर से हर संभव तकनीकी और अतिरिक्त मदद भेजने के निर्देश दिए गए हैं। इस हादसे ने एक बार फिर स्थानीय स्तर पर बांधों और जलाशयों में बिना सुरक्षा मानकों (लाइफ जैकेट) के संचालित होने वाली अवैध और असुरक्षित नावों पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। फिलहाल पूरा फोकस रेस्क्यू ऑपरेशन को तेज कर लापता लोगों को खोजने पर है।