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Chhattisgarh PM Awas News: सत्यापन में दो लाख अपात्र मिले, पुराने आंकड़ों को लेकर फिर गरमाई सियासत

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रायपुर, 16 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण को लेकर पुराने आंकड़ों और मौजूदा स्थिति पर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। योजना के तहत पात्र परिवारों की पहचान, सर्वे और प्रशासनिक स्वीकृतियों के आंकड़ों के बीच अब सत्यापन में बड़ी संख्या में अपात्र पाए जाने की बात सामने आई है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पात्रता की जांच प्रक्रिया में बड़ी संख्या में नामों का परीक्षण किया गया है। 

सर्वे और सत्यापन से सामने आई तस्वीर

छत्तीसगढ़ के सामाजिक-आर्थिक सर्वे में करीब 60 लाख परिवारों का सर्वे किया गया था। सरकारी दस्तावेज के अनुसार, सत्यापन के बाद 10,76,585 परिवार पात्र पाए गए, जबकि 47,090 परिवारों को बेघर के रूप में चिन्हित किया गया था। योजना की पात्रता सूची और आवास प्लस सूची के आधार पर भी आगे की प्रक्रिया की गई। 

वहीं, राज्य में पात्रता की जांच के दौरान करीब दो लाख लोगों के अपात्र पाए जाने का मुद्दा अब राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन गया है। ऐसे में पुराने दावों और वास्तविक सत्यापन के आंकड़ों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच सवाल-जवाब का दौर जारी है।

आवास निर्माण को लेकर सरकार के आंकड़े

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत राज्य में आवास निर्माण की प्रक्रिया लगातार जारी है। हाल ही में राज्य में 2 लाख नवनिर्मित आवासों में गृह प्रवेश कराया गया था। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के लिए 3.65 लाख अतिरिक्त आवासों की घोषणा भी की गई। �

Press Information Bureau

केंद्र के आधिकारिक दस्तावेजों में छत्तीसगढ़ में PMAY-G के तहत आवास निर्माण की प्रगति और लक्ष्य से जुड़े आंकड़े भी दर्ज हैं। वर्ष 2024 के आकलन में राज्य में बड़ी संख्या में आवास पूर्ण होने की जानकारी दी गई थी, साथ ही शेष आवासों को समय पर पूरा करने पर जोर दिया गया था। 

पात्रता तय करने में सत्यापन अहम

प्रधानमंत्री आवास योजना में वास्तविक पात्र परिवारों तक लाभ पहुंचाने के लिए सर्वे, दस्तावेजों की जांच और भौतिक सत्यापन महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। अपात्र नामों को हटाने और पात्र परिवारों को सूची में शामिल करने के लिए जिलों में दावा-आपत्ति की प्रक्रियाएं भी आयोजित की जाती रही हैं।

ऐसे में दो लाख अपात्र पाए जाने का आंकड़ा योजना के पुराने रिकॉर्ड और वर्तमान सत्यापन के बीच अंतर को सामने लाता है। अब इस मुद्दे पर राजनीतिक दावों के साथ-साथ पात्रता और आवास निर्माण के वास्तविक आंकड़ों पर भी चर्चा तेज हो गई है।

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