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Jhiram Ghati Case News: झीरम जांच पर कांग्रेस के सवालों पर विजय शर्मा का पलटवार, बोले- ‘सबूत जेब में रखे थे क्या?’

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जगदलपुर। झीरम घाटी नरसंहार मामले में एनआईए की जांच और हालिया अदालत के फैसले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। डिप्टी सीएम और गृहमंत्री विजय शर्मा ने जांच पर सवाल उठाने वाले कांग्रेस नेताओं पर तंज कसते हुए पूछा कि अगर किसी के पास मामले से जुड़े सबूत थे, तो उन्हें जांच एजेंसी के सामने क्यों नहीं रखा गया। 

39 आरोपी बनाए गए थे

विजय शर्मा के अनुसार, झीरम मामले की जांच में एनआईए ने 39 लोगों को आरोपी बनाया था। उन्होंने कहा कि इनमें से 14 लोग आत्मसमर्पण के बाद पुनर्वास प्रक्रिया के तहत सामान्य जीवन जी रहे हैं, जबकि अन्य आरोपियों को लेकर भी जांच और न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ी।

NIA कोर्ट ने 10 आरोपियों को सुनाई मौत की सजा

झीरम घाटी मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने 16 सितंबर 2026 को 10 आरोपियों को मौत की सजा सुनाई। एनआईए के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी इस फैसले की पुष्टि की गई है। अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील के लिए 30 दिन का समय दिया गया है।

जांच पर सवाल को लेकर विजय शर्मा का जवाब

विजय शर्मा ने कांग्रेस की ओर से जांच पर उठाए जा रहे सवालों पर कहा कि यदि किसी के पास महत्वपूर्ण साक्ष्य थे, तो उन्हें जांच एजेंसियों के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए था। उन्होंने इसे लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर भी निशाना साधा और कहा कि सरकार चलाने के दौरान भी यदि किसी के पास सबूत थे तो उन्हें जांच एजेंसी को सौंपा जा सकता था। 

वहीं, कांग्रेस नेताओं और कुछ पीड़ित परिवारों की ओर से यह सवाल उठाए गए हैं कि आत्मसमर्पण करने वाले कुछ माओवादी नेताओं की भूमिका की जांच किस तरह हुई और बड़े आरोपियों तक जांच क्यों नहीं पहुंची। ये सवाल राजनीतिक नेताओं और पीड़ित पक्षों द्वारा उठाए गए हैं; इन्हें अदालत के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

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